रविवार, 16 नवंबर 2008

कश्मीर में अब मंदिरों पर कब्जे का दौर

कोई कहे कि कश्मीर में मंदिर तोड़े जा रहे हैं, तो आप कहेंगे इसमें नया क्या है। नई बात यह है कि अब नष्ट मंदिरों की संपत्ति पर बड़े पैमाने पर कब्जे हो रहे हैं। यह बात उप मुख्यमंत्री भी स्वीकार करते हैं और मौलवी एजाज जैसे कानूनदां भी, जो कब्जा करने वालों को घाटी का 'टेंपल लैंड माफिया' कहते हैं।
कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के संजय टिक्कू कहते हैं कि आतंकी हिंसा शुरू होने से अब तक 565 प्रमुख मंदिर जलाए जा चुके हैं। गली-मोहल्लों के मंदिर गिने जाएं, तो तादाद दो हजार से अधिक है। एडवोकेट मौलवी एजाज का आरोप है, 'मंदिरों की संपत्ति बेची जा रही है। घाटी में टेपल लैंड माफिया सक्रिय है। हिंदू-मुसलिम व नौकरशाही सब इसमें शामिल हैं। लैंड एबालिशमेंट एक्ट मंदिरों की संपत्ति पर लागू नहीं होता, लेकिन यहां उसकी आड़ में अपने चहेतों को मंदिरों की जमीन बांटी जा रही है। बाबा धर्मदास मंदिर की 14,000 कनाल जमीन थी, जो इसी एक्ट की आड़ में बेच दी गई।' शायद इसीलिए विभिन्न धार्मिक संगठनों ने मंदिरों की संपत्ति बेचने की सीबीआई जांच की मांग की है।
बसंतबाग मंदिर के पास अपना आटो रिक्शा साफ कर रहे अख्तर का कहना है कि पहले यहां भट्ट पूजा करते थे, पर उसने इस सवाल पर चुप्पी साध ली कि मंदिर किसने जलाया, कौन पत्थर उखाड़ रहा है। प्राचीन मंदिरों के विशाल परिसर और उनकी संपत्ति पर कब्जे से चिंतित उप मुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग कहते हैं कि राज्य सरकार मंदिरों की सुरक्षा के लिए विधेयक लाने जा रही है। एक अथारिटी बनेगी, जो प्रशासन के साथ मिलकर मंदिरों की देखभाल करेगी। मंदिरों की संपत्ति पर कब्जा करने वालों के खिलाफ हम कार्रवाई करने जा रहे हैं।
पनुन कश्मीर के डा. अजय चुरंगु मंदिर बिल से उत्साहित नहीं हैं। उनके संगठन ने 55 मंदिर कमेटियों की सहमति से एक मसौदा सरकार को सौंपा था। वह कहते हैं, 'हम देखना चाहते हैं, सरकार हमारे कितने सुझाव बिल में शामिल करती है। हम चाहते है कि समिति में कोई गैर हिंदू न हो।'
नष्ट मंदिरों की मूर्तियों का कहीं ब्योरा नहीं है। धर्मार्थ ट्रस्ट के एक अधिकारी ने कहा कि मंदिरों के बड़े-बड़े पत्थर खास घरों की दीवारों में लगे हैं। एपीएमसीसी के विनोद पंडित के अनुसार कितनी प्राचीन मूर्तियां बिक चुकी हैं, इसकी गिनती नहीं। मंदिरों और शैववाद के विशेषज्ञ प्रो. एमएल कौल कहते हैं कि जैनाकदल में खानकाह, मां काली के मंदिर पर ही बनी है। इसे सैय्यद मीर हमदानी नामक मुसलिम संत के कहने पर सिकंदर बुतशिकन ने तोड़ कर खानकाह बनवा दी।
उधर, कई संगठन मंदिरों के किवाड़ फिर से खोल रहे है। विनोद पंडित कहते हैं कि हमने दस मंदिरों के किवाड़ खोले, लेकिन बाद में स्थिति आतंकवाद के चरम दौर वाली हो गई। हमने किवाड़ खोले तो सबने सराहा, प्रशासन ने वाहवाही लूटी; लेकिन बाद में हमारे लोगों की सुरक्षा वापस ले ली गई।
क्या कहते हैं कश्मीरी नेता:
-मंदिरों की मूर्तियां तस्करों ने चोरी की होंगी
[शब्बीर अहमद शाह, अध्यक्ष, जम्मू कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी]
-मंदिरों को जलाना या गिराना कश्मीरी मुसलमान का काम नहीं। कश्मीरी पंडित लौटे, लेकिन उन्हें हमारी तहरीक के मुखालिफ काम नहीं करना होगा। हम शुरू से कह रहे है कि यहां कुछ बाहरी तत्व मंदिर बेच रहे है।
[सैय्यद अली शाह गिलानी, हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के नेता]